Our modern Communication System in Hindi

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संचार व्यवस्था में प्रयुक्त कुछ अन्य युक्तियाँ (Some Other Devices Used in Communication System)

(1) इन्टरनेट (Internet) —

Internet- यह परस्पर एक – दूसरे से आन्तरिक रूप से जुड़े हुए कम्प्यूटरों का एक विश्वव्यापी निकाय है । इसके माध्यम से इस निकाय में जुड़े हुए कम्प्यूटरों के बीच सभी प्रकार की सूचनाओं का आदान – प्रदान हो सकता है । Internet शब्द INTER – NET Work का संक्षिप्त रूप है । इसको सामान्यत : NET भी कह देते हैं । सबसे पहला Internet सन् 1969 में U.S. के सैन्य विभाग द्वारा क्रियान्वित किया गया जिसको ARPANET ( Advanced Reacherch Agency Network) नाम दिया गया।

Internet

सन् 1990 तक विश्व के अनेक देश कम्प्यूटरों के बीच इस इन्टरनेट संचार प्रणाली के लिए अनुपालित नियमों के एक समूह से जुड़े , जिनको प्रोटोकाल कहते हैं । आजकल प्रोटोकोल्स के प्रामाणिक निकाय प्रयुक्त किये जाते हैं जिनको Transmission Control Protocol / Internet Protocol ( TCP / IP ) कहते हैं । भारत में Internet का प्रारम्भ विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा सन् 1988 में हुआ । Internet पर सूचनाओं का आदान – प्रदान बहुत तीव्र गति से (प्रकाश के वेग पर) होता है ।

Internet हमारे जीवन का अनिवार्य अंग (Integral Part) बन चुका है । आजकल शिक्षा , व्यापार , मनोरंजन तथा शासन प्रणाली के क्षेत्र में Internet एक आवश्यक साधन है । इन्टरनेट प्रणाली में दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों के बीच सूचनाओं का आदान – प्रदान इनको जोड़ने वाले तारों (wires) के माध्यम से अथवा संचार प्रणाली की किसी बेतार (wireless) प्रणाली के माध्यम से होता है । एक थोड़े क्षेत्र में ( जैसे दफ्तरों , स्कूलों आदि ) में कम्प्यूटरों का पारस्परिक networking स्थानीय क्षेत्र नेटवर्किंग ( Local Area Networking ) कहलाता है जिसको संक्षिप्त में LAN कहते हैं । प्रिन्टर , स्कैनर आदि युक्तियों को भी एक LAN में जोड़ा जा सकता है।

प्रत्येक लेन ( LAN ) में कुछ मुख्य कम्प्यूटर होते हैं जिनको सरवर कम्प्यूटर कहते हैं । इनका उपयोग LAN को उपग्रह संचार माध्यम से दूसरे नेटवर्कों से जोड़ने के लिए किया जाता है । इस प्रकार विभिन्न LAN परस्पर जुड़कर एक विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क (Wide Area Network) बनाती है जिसको संक्षिप्त में WAN कहते हैं।

की भाँति परस्पर जोड़ी गयी विभिन्न WAN इन्टरनेट निकाय बनाती हैं। स्थानीय क्षेत्र नेटवर्किंग की सभी सूचनाएँ LAN के सरवर कम्प्यूटरों में संगृहीत की जाती हैं । प्रत्येक LAN के सरवर कम्प्यूटर इसमें जुड़े सभी कम्प्यूटरों तथा दूसरे नेटवर्कों के सरवर कम्प्यूटरों के बीच सूचनाओं के आदान – प्रदान के लिए एक चैनल की भाँति कार्य करते हैं ।

डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू (WWW)

यह विश्वव्यापी सूचना तन्त्र का एक ढाँचा है । इन्टरनेट में सूचनाएँ वेब पृष्ठों ( Web Pages ) के माध्यम से प्रदत्त की जाती हैं अथवा प्राप्त की जाती हैं । इनमें text , दस्तावेज , प्रतिबिम्ब (images) तथा दृश्य ( videos ) निहीत होते हैं । शासकीय विभाग , कम्पनियाँ , अशासकीय संगठन ( NGO ) तथा कोई भी व्यक्ति अपने क्रियाकलापों के विषय में सीमित अथवा मुक्त उपयोग के लिए अपनी सूचना इसमें दे सकते हैं । यह जानकारी इसके उपभोक्ताओं के लिए सुलभ हो जाती है । एक वेब पृष्ठ से दूसरे वेब पृष्ठ पर एक निकाय ( तन्त्र ) द्वारा जाया जा सकता है जिसे Interlinked Hypertext दस्तावेज कहते है । इन्टरनेट पर वेब पृष्ठों को जोड़ने के माध्यम से सूचनाओं के प्रसारण का यह तरीका World Wide Web ( संक्षेप में www ) कहलाता है।

Website

कोई भी व्यक्ति इन्टरनेट पर अपनी कोई विशेष सूचना वेब पृष्ठों के युग्म बनाकर दे सकता है जो उस सूचनाओं को संगृहीत रखते हैं । वेब पृष्ठों का यह सेट वेबसाइट ( Website) कहलाता है। संक्षेप में इसको Web कहते हैं।

exammedia.net

वेबसाइट के एक पृष्ठ से दूसरे पृष्ठ पर जाने की प्रक्रिया इन्टरनेट सरफिंग ( Internet Surfing ) कहलाती है । बहुत – से सर्च इंजन , जैसे याहू , गूगल आदि सम्बन्धित वेबसाइटों की सूची बनाकर जानकारी प्राप्त करने में हमारी सहायता करते हैं । प्रत्येक व्यक्ति अपने कम्प्यूटर को इन्टरनेट से Internet Service Provider ( ISP ) के माध्यम से जोड़ सकता है जिसके लिए उसको कुछ शुल्क अदा करना पड़ता है । सामान्यतः मोबाइल नेटवर्क कम्पनियाँ ISP की तरह कार्य करती हैं ।

इन्टरनेट के अनुप्रयोग (Applications of Internet)

(i) ई-मेल (E – mail) –

यह Electronic mail का संक्षिप्त रूप है। इसको इलेक्ट्रॉनिक डाक भी कहा जाता है । यह हस्तलिखित दस्तावेजों को इन्टरनेट के माध्यम से दूरस्थ स्थानों को प्रेषित करने की एक विधि है । इसके द्वारा दस्तावेजों के साथ images तथा videos भी भेजी जा सकती हैं । यह सस्ता एवं तीव्र साधन है । इन्टरनेट की इस सुविधा का उपयोग करने के लिए उपभोक्ता को एक अपना व्यक्तिगत e – mail विवरण ई – मेल आईडी अथवा ई – मेल पते के साथ रखना होता है । E – mail Id एक तरह का पहचान – पत्र है जिस पर नाम तथा पता लिखा होता है । इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति आपसे इन्टरनेट के माध्यम से सम्पर्क बना सकता है । कुछ वेबसाइट इन्टरनेट उपभोक्ताओं को निःशुल्क ई – मेल बॉक्स तथा आईडी उपलब्ध कराती हैं । ये ई – मेल आईडी एक पासवर्ड (passward) से सुरक्षित रहती हैं। अत : ये जिस व्यक्ति से सम्बन्धित हैं उसके अतिरिक्त अन्य कोई इसका प्रयोग नहीं कर सकता है । ISP भी ई – मेल आईडी उपलब्ध कराती है।

email

ई – मेल आईडी (e-mail Id) सामान्यतः निम्न रूप में होती है

उपभोक्ता का नाम @ डोमेन का नाम . com डोमेन का नाम उस सरवर के विषय में सूचना देता है जो इस ई – मेल सुविधा को उपलब्ध करा रहा है । चिह्न @ के बाद वाले भाग में com के स्थान पर शिक्षा क्षेत्र के लिए edu , किसी ऑर्गेनाइजेसन के लिए ( org ) , सरकारी विभाग के लिए ( gov ) , देशों के डोमेन नाम नियत हैं जैसे यूनाइटेड किंगडम के लिए uk , भारत के लिए in आदि । यदि U.K. मिश्रा नाम का कोई व्यक्ति भारत में उड़ीसा में स्थित रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत है तो उसका e – mail address [email protected] लिखा जायेगा।

चूँकि इन्टरनेट में सूचना प्रसारण विद्युत् – चुम्बकीय तरंगों के माध्यम से होता है , अत : ई – मेल के माध्यम से भेजी गयी सूचना इसको प्राप्त करने वाले के पास तुरन्त पहुँच जाती है । ई – मेल के माध्यम से भेजी गयी सूचना ई – मेल बॉक्स में तब तक सुरक्षित रहती है जब तक कि इसको पढ़ा नहीं जात है । e- मेल के माध्यम से ग्रीटिंग कार्ड भी भेजे जा सकते हैं।

(ii) फाइल स्थानान्तरण (File transfer)

यदि कोई व्यक्ति एक कम्प्यूटर की फाइल से दूसरे कम्प्यूटर में नकल करना चाहता है तो यह क्रिया फाइल स्थानान्तरण कहलाती है । यह कार्य इन्टरनेट वर्क के माध्यम से किया जाता है । इसके लिए एक विशेष तकनीकी का प्रयोग किया जाता है जिसमें सबसे पुरानी तकनीक File Transfer Protocol ( F.T.P. ) है । यह एक Application Protocol है जो वेब पृष्ठ को एक उपभोक्ता के कम्प्यूटर से वेब सरवर को स्थानान्तरित करने के लिए TCP / IP का प्रयोग करती है । उपभोक्ता कम्प्यूटर से सरवर कम्प्यूटर को फाइल का स्थानान्तरण uploading कहलाता है तथा सरवर कम्प्यूटर से फाइल का किसी उपभोक्ता को स्थानान्तरण downloading कहलाता है । F.T.P. सरवर पर प्रत्येक फाइल पर एक पता ( URL ) दिया जाता है ताकि इन्टरनेट से जुड़े अन्य कम्प्यूटर इसको ढूँढ़ सके ।

(iii) ई – बैंकिंग (E – banking) —

यह एक इलेक्ट्रॉनिक अदायगी ( electronic payment ) निकाय है जो वित्तीय संस्थानों ( बैंकों ) द्वारा संचालित वेबसाइट पर ग्राहकों को वित्तीय आदान – प्रदान ( financial transaction ) उपलब्ध कराता है । इसके उपयोग के लिए ग्राहक को वित्तीय संस्थान का सदस्य होना आवश्यक है तथा उसके पास इन्टरनेट कनक्शन भी होना चाहिए । वित्तीय संस्थान ग्राहक को एक लॉजिन ( login ) नम्बर तथा पासवर्ड उपलब्ध कराता है । इस सुविधा के माध्यम से ग्राहक अपने खाते की अवशेष धनराशि ( balance ) की जानकारी , चैक बुक प्राप्ति के लिए प्रार्थना – पत्र , ऋण के लिए प्रार्थना – पत्र , क्रेडिट कार्ड , डेबिट कार्ड आदि सुविधाओं को ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है ।

(iv) ई – कॉमर्स (E – commerce) अथवा ई – शॉपिंग ( E – shopping ) –

यह Electronic Commerce ( इलेक्ट्रॉनिक व्यापार ) का संक्षिप्त रूप है। इस प्रक्रिया में व्यापार से सम्बन्धित सभी प्रक्रियाएँ इन्टरनेट के माध्यम से समाहित हैं । यह ग्राहकों को स्वेच्छा के आवश्यक सामानों को चुनने की विस्तृत छूट (choice) प्रदान करती है । यह मनुष्यों को अपने घर या दफ्तर से बिना हिले सामान खरीदने , बिल अदा करने , बैंकों से धन के आदान – प्रदान करने , टिकट बुक कराने आदि की सुविधा इन्टरनेट के माध्यम से कम्प्यूटर के माउस को तुरन्त दबाते ही प्रदान करता है ।

E - commerce

सामान बेचने वालों की वेबसाइट के माध्मय से सामान खरीदने की प्रक्रिया ई – शॉपिंग कहलाती है । इसी प्रकार यह ऐसी वेबसाइट है जिस पर कोई उत्पादक अपने उन उत्पादों के चित्र भी प्रस्तुत (upload) कर सकता है जिनको वह बेचना चाहता है । ग्राहक विविध उत्पादों अथवा अन्य सेवाओं के चित्र देखकर विभिन्न कम्पनियों के वेबसाइट पर उनके उत्पादों तथा सेवाओं के विषय में जानकारी प्राप्त कर सकता है । इलेक्ट्रॉनिक साधनों जैसे क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके व्यापार बाजार से सम्बन्धित विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ इन्टरनेट के माध्यम से उत्पादों का यह व्यापार ई – कॉमर्स कहलाता है ।

(v) बातचीत – गपशप ( इन्सटैण्ट रिले चैट ) ( Instant Relay Chat – IRC ) –

एक जैसी रुचि के व्यक्तियों द्वारा टाइप किये हुए संदेशों द्वारा बातचीत को चैट ( Chat ) करना कहते हैं । चैट समूह में सम्मिलित कोई भी व्यक्ति तात्कालिक संदेश प्राप्त करके उसका उत्तर तुरन्त ही दे सकता है । IRC अनेक उपभोक्ताओं ( users ) तथा अनेक चैनलों वाला आसान तरीके से बातचीत करने का एक तन्त्र है । यह निःशुल्क सुविधा है जिसके माध्यम से हम सम्पूर्ण विश्व के मनुष्यों से अपने विचारों का संचार कर सकते हैं । इसके द्वारा इन्टरनेट से जुड़े अपने कम्प्यूटरों द्वारा एक – दूसरे के सन्देश अल्प समय में अभिलेखित कर पढ़ सकते हैं । तुरन्त सन्देशवाहक उपक्रमों के उदाहरण हैं : AOL , AIM , Yahoo Messanger , MSN Messanger , ICQ तथा गोगल बातचीत आदि।

(2) आँकड़ों का सम्प्रेषण तथा अभिग्रहण (Data Transmission and Reception अर्थात् MODEM) –

संचार के लिए उपयुक्त तथ्यों , विचारों तथा निर्देशों को डाटा कहते हैं । अधिकांशत : डाटा स्पन्द टाइप सूचनाओं से बने होते हैं । एनालॉग सिगनलों को भी कोडिड स्पन्दों की श्रृंखला के रूप में बदला जा सकता है । कम्प्यूटर के प्रयोग से प्रत्येक क्षेत्र में डाटा ( आँकड़ों ) का एक मशीन से दूसरी मशीन के लिए सम्प्रेषण बहुत महत्वपूर्ण हो गया है । मॉडेम का प्रयोग आंकिक आँकड़ों (Digital data) के सम्प्रेषण तथा अधिग्रहण में किया जाता है।

MODEM

मॉडेम को डाटा सेट भी कहते हैं , क्योंकि यह आँकड़ों के स्रोत ( कम्प्यूटर ) को प्रेषी अथवा ग्राही से जोड़ता है ।

मॉडेम (Modem) –

यह modulator शब्द के प्रथम तीन अक्षर mod तथा demodulator शब्द के प्रथम तीन अक्षर dem का संयोग है अर्थात् mod + dem = moddem , जिसको संक्षिप्त में modem लिखा जाता है ।

अतः “ मॉडेम एक ऐसी युक्ति है जिसमें मॉड्यूलेशन (modulation) तथा विमॉड्यूलेशन (demodulation) दोनों ही क्रियाएँ सम्पन्न की जाती हैं। वास्तव में यह एक ऐसी युक्ति है जो दो कम्प्यूटरों को परस्पर एक टेलीफोन लाइन द्वारा जोड़ती है।”

कार्य – सिद्धान्त – जब मॉडेम का प्रयोग संदेश प्रेषण क्रिया (transmission action) में किया जाता है तो यह डिजिटल संकेतों को ग्रहण कर एनालॉग संकेत में बदल देता है तथा उसे वाहक तरंग से मॉड्यूलित करके टेलीफोन लाइन में भेज देता है । जब मॉडेम का प्रयोग संदेश अभिग्रहण क्रिया (receiving action) में किया जाता है तो यह प्राप्त मॉड्यूलित संकेत (signal) से वाहक तरंग अवयव को अलग करके अर्थात् मॉड्यूलित तरंग को विमॉड्यूलित करके एनालॉग सिगनल प्राप्त करता है तथा उसको पुनः संदेश के डिजिटल संकेत में परिवर्तित कर देता है । इस प्रकार प्रत्येक संचार व्यवस्था में प्रेषित्र (transmitter) तथा अभिग्राही (receiver) के साथ – साथ एक मॉडेम जुड़ा होता है।

(3) दस्तावेज सम्प्रेषण तथा अभिग्रहण (Document Transmission and Reception अर्थात् FAX) –

फैक्स एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जिसके द्वारा किसी * दस्तावेज (document) के उसी रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान को प्रेषित करने (भेजने) के लिए किया जाता है ।” Fax शब्द वास्तव में एक शब्द facsimile (फैक्सीमिलि) का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ है अनुकृति या प्रतिरूप (copy)।

FAX

इस प्रकार फैक्स मशीन किसी भी दस्तावेज की नकल (copy) करके उसे दूसरे स्थान को प्रेषित कर देती है तथा उस स्थान पर लगी दूसरी फैक्स मशीन उस नकल को पुनः एक सफेद कागज पर छाप ( print ) देती है । Fax मशीन किसी स्थिर दस्तावेज का ही प्रतिबिम्ब प्रदान करती है । यह टेलीविजन की तरह गतिशील वस्तुओं के प्रतिबिम्ब प्रदान नहीं करती है । प्रेषी फैक्स मशीन की प्रक्रिया में सर्वप्रथम प्रेषित किये जाने वाले दस्तावेज का प्रकाश स्रोत द्वारा कमवीक्षण (scanning) किया जाता है तथा इससे सम्बन्धित प्रकाशीय संकेत (optical signals) प्राप्त किये जाते हैं । ये सिगनल एक फोटो डिटेक्टर द्वारा वैद्युत सिगनलों में परिवर्तित किये जाते हैं । अन्त में इन विद्युत् सिगनलों को कोडिड करके एक उचित संचार विधि द्वारा दूसरी फैक्स मशीन की ओर प्रेषित कर दिया जाता है जहाँ इन सिगनलों को पुनः प्रकाशीय सिगनल में परिवर्तित कर मूल दस्तावेजों की नकल ( copy ) प्रिन्टर द्वारा प्राप्त कर ली जाती है ।

(4) मोबाइल टेलीफोनी (Mobile Telephony) –

साधारण लैण्डलाइन फोनों में फोन उपकरण टेलीफोन एक्सचेन्ज से वैद्युत चालक तारों द्वारा सम्बन्धित रहते हैं । टेलीफोन एक्सचेन्ज हमारे फोन से प्रेषित कोल को दूसरे फोन (जिससे हमको बात करनी होती है) प्रेषित करता है । विद्युत् तारों द्वारा बनाये गये संयोजन इन फोनों की गतिशीलता (mobility) को सीमित करते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए मोबाइल टेलीफोन तकनीकी का आविष्कार हुआ।

Mobile Telephony

Working principle of mobile phone

मोबाइल टेलीफोन आजकल सर्वाधिक प्रयुक्त किया जाने वाला संचार साधन है। मोबाइल टेलीफोन एक निम्न शक्ति द्वारा संचालित ऐसी युक्ति है जो बिना तार के रेडियो आवृत्ति सिगनलों को प्रेषित करता है तथा ग्रहण करता है । पुलिस वालों के द्वारा प्रयुक्त वायरलैस सेट में श्रव्य सिगनलों को प्रेषित करने तथा ग्रहण करने दोनों के लिए एक ही रेडियो आवृत्ति प्रयुक्त की जाती है । इसलिए इस सेट पर बोलने वाला सिपाही एक वाक्य पूरा करने के बाद over कहता है तथा तब सुनता है । यद्यपि मोबाइल टेलीफोन में बाहर जाने वाले तथा प्राप्त किये जाने वाले सिगनलों के लिए विभिन्न आवृत्तियाँ प्रयुक्त की जाती हैं इसलिए इनके द्वारा दो व्यक्ति साथ – साथ बातचीत कर सकते हैं तथा सुन सकते हैं । मोबाइल टेलीफोनी की परिकल्पना सर्वप्रथम 1970 के दशक में विकसित की गई और अगले दशक में इसे पूर्णतः लागू कर दिया गया।

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